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क्या पूरा होगा दिवास्वप्न? हिंदी कविता

धीरे से, कोई आहट न हुई

फिर आज तोड़ दी गयी आशंकाएं

इस बदरंग जमाने में

कुचल दी गयी संवेदनाएं