मेरी प्रार्थना – मैं ईश्वर से क्या मांगता हूँ

मेरे देव,

 

मुझे संकटों से बचाओ, यह प्रार्थना करने मैं तुम्हारे द्वार नहीं आया. मैं तो वह शक्ति मांगने आया हूँ, जो संकटों में संघर्ष कर खिलती है.

 

मैं जीवन के दुखों से भयभीत हो, उनसे रक्षा करने की प्रार्थना करने नहीं, उन दुखों का सामना करने का साहस मांगने आया हूँ.

 

मैं मंझधार से हाँथ पकड़ कर निकालने की प्रार्थना करने नहीं, उसी में तैरते रहने का उत्साह मांगने आया हूँ.

 

तुमने मुझे काँटों पर चलने की प्रेरणा दी, गिरने पर उठ चलने का सहारा दिया. मुझे सदा अपनी छाया दी, तभी तो मैं तुझसे यह वरदान मांगने आया हूँ की कोई मुझे विष पिलाये, तब भी मैं उसे अमृत पिला सकूँ.


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