यहाँ मैं अजनबी हूँ

131
Hindi Poem - Yahan Main Ajnabi Hoon by Surendra

किससे करूँ शिकवा शिकायत ,

किससे करूँ यारी दोस्ती ,

किससे करूँ नफरत दुश्मनी ,

यहाँ मैं अजनबी हूँ .

बेगाना शहर है ,

अनजान डगर है ,

सब अजनबी हैं ,

ये मेरा , वो मेरा ,

सब कुछ है मेरा ही मेरा ,

बस यही सियासत है ,

जो कुछ देखो

सब कुछ ले लो ,

कोई नहीं है अपना पराया ,

यहाँ मैं अजनबी हूँ .

सब मतलबपरस्त हैं ,

दोस्ती मतलब की ,

दुश्मनी मतलब की ,

प्यार भी मतलब का ,

सब मतलबी हैं ,

मतलब निकल गया ,

तो क्या तेरा क्या मेरा ,

छोडो सब कुछ है मेरा ,

भुला दिए सब रिश्ते नाते ,

भुला दिए सब आते जाते ,

यहाँ मैं अजनबी हूँ ,

बस ,

यहाँ मैं अजनबी हूँ ………….

सुरेन्द्र मोहन सिंह