हिंदी कविता – चाहत

छू लो उन गहराइयों को जिनसे तुम्हें मोहब्बत है,

छू लो उन ऊंचाइयों को जिनकी तुम्हें चाहत है.

पा लो उन सच्चाइयों को जिनकी तुमको हसरत है.

 

मन में एक विचार करो, मन तुम्हारा अपना है,

तन से तुम वो कार्य करो, तन तुम्हारा अपना है,

तन, मन, धन से जुट जाओ, दृढ संकल्प तुम्हारा हो.

 

पा लो तुम उस मंजिल को, जिसकी तुम्हें तमन्ना है,

छू लो उन गहराइयों को जिनसे तुम्हें मोहब्बत है.

 

अड़चन कितनी भी आये, कभी न डेग से तुमको हिलना,

गिर के उठना उठ के गिरना, यही तुम्हारा मकसद हो,

ठोकर खाकर के संभलना, यही तुम्हारा जीवन हो.

 

पा लो अपने ध्येय को जिसकी तुमको ख्वाहिश है,

छू लो उन गहराइयों को जिनसे तुम्हें मोहब्बत है,

छू लो उन ऊंचाइयों को जिनकी तुम्हें चाहत है.

पा लो उन सच्चाइयों को जिनकी तुमको हसरत है.
साभार: रोली गुप्ता


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