सामाजिक

बच्चे जिन्हें जंगली जानवरों ने पाला-पोसा

हकीकत में मोगली जैसे इंसान हुए हैं जिन्हें जंगली जानवरो ने पाला पोसा और वे उन जानवरों की तरह ही हरकत करते थे. ये वो बच्चे थे जो बचपन में ही जंगल में खो गए थे या फिर उन्हें जंगली जानवर उठा कर ले गए थे, और उन्हें जंगली जानवरों ने मारकर खाने के बजाय पाला पोसा.

क्या कोई समय चुरा सकता है? आइये देखते हैं, कैसे करते हैं लोग समय की चोरी

आपने लोगों को टाइम पास करते सुना होगा, समय काटते, समय बर्बाद करते सुना होगा लेकिन क्या आपने कभी सुना है की लोग समय की चोरी भी करते हैं. हाँ जी आपने सही सुना, बहुत सारे लोग करते हैं समय की चोरी. हो सकता है आप में से भी कुछ लोग समय चुराते हों.

10 मिनट में हेलीकॉप्टर से दिल्ली दर्शन, वो भी केवल 2500 रुपये में

अभी तक केवल वीआईपी लोग ही हेलीकाप्टर में बैठ और घूम पाते थे, लेकिन अब आप भी हेलीकाप्टर से दिल्ली की सैर कर सकते हैं और वो भी मात्र 2500 रुपये में.

उत्तर प्रदेश में महिलाओं के पैर छूकर सपा प्रत्याशी के लिए वोट मांग रही है रूसी महिला

एलिसा भी घर-घर जाकर महिलाओं के पैर छूकर वोट मांग रही हैं. एक विदेशी महिला को देखकर महिलाओं का हुज़ूम उन्हें देखने उमड़ पड़ता है. लोगों को तब और भी अचम्भा होता है जब एलिसा फर्राटेदार हिंदी बोलती हैं.

हमारे देश में हुनर की कमी नहीं है, बस सरकारें सहयोग नहीं करती हैं

हुनर की बात करें तो क्या हमारे देश में हुनर की कमी है? हम ओलम्पिक जैसी प्रतियोगिताओं में क्यों पदक के लिए पलकें बिछाये रहते हैं?

भारत का एक ऐसा गाँव जहां लड़की के जन्म पर 111 पौधे लगाए जाते हैं

भारत एक ऐसा देश है जहां पर पुत्र प्राप्ति के लोग न जाने क्या क्या करते हैं और पुत्री को बोझ की तरह देखते हैं, वहीं राजस्थान के पिपलांत्री नामक गाँव में पुत्री जन्म को एक उत्सव की तरह मनाते हैं और उसे यादगार बनाने के लिए 111 फलदार वृक्षों का रोपण करते हैं.

विकास किसका, देश या सांप्रदायिकता का? गन्दी राजनीति के उदाहरण

देश के 1947 में विभाजन पर भड़के दंगों ने कई लाख लोगों के घरों का उजाड़ दिया। लोगों ने इसे अपनी नीयती मानकर मन को समझा लिया क्योंकि देश भारत-पाकिस्तान के रूप में बंट गया था। फिर से आपसी भाइचारे की नींव डलने लगी थी, देश विकास की ओर अग्रसर होने को तैयार था, लेकिन कहते हैं न कि जख्म कभी न कभी तो हरे हो ही जाते हैं, बस उनको कुरेदने वाले शख्स चाहिए।

विकसित भारत की एक तस्वीर – फटे कपडे, हाथ में पट्टी और जमीन पर खाना – पालमती देवी

रांची, मरीज पालमती देवी, हाथों में पट्टी बंधी हुई, बिना प्लेट के फर्श पर खाना खाती हुई, क्या दोष है? गरीबी या नीची जाति या फिर संवेदनहीनता? लेकिन क्या यही विकास है?

राधा कृष्ण की धरती के बारे में कुछ अनजानी बातें – गोवर्धन परिक्रमा

गोवर्धन पर्वत का हिन्दू धर्म में बहुत ही अधिक महत्त्व है. इसकी परिक्रमा करने से सभी मुरादें पूरी हो जाती हैं. 21 किलोमीटर की गोवर्धन परिक्रमा को लोग नंगे पाँव पूरा करते हैं तो कुछ लोग लोट – लोट कर इसकी परिक्रमा लगाते हैं. यहां परिक्रमा लगाने का कोई नियत समय नहीं है. लोग साल के 365 दिन यहां परिक्रमा लगाते हैं लेकिन हर महीने की पूर्णमासी को यहाँ बेशुमार भीड़ होती है.

पदक के ख्वाब मत देखो, हमें पदक नहीं चाहिए – हमें रोजी-रोटी में उलझाये रखो

सड़क के किनारे खेल दिखाने वाले, ट्रेन में जिम्नास्ट की कलाकारी करते छोटे छोटे बच्चे, सोचने पर मजबूर कर देते हैं, क्या 130 करोड़ के भारत में प्रतिभाओं की कमी है…

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