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सुख और दुःख – बस यही तो है जिंदगी

इस कृषि प्रधान भारत देश को स्वतंत्र हुए साठ साल से भी ज्यादा हो गए हैं लेकिन किसानों की दशा वहीं की वहीं है. किसान तब भी कर्ज में डूबा था और अब भी कर्ज में डूबा है, पहले साहूकारों का, और अब खाद बीज वालों और आढ़तियों का.

सावधान – कैमरे कहीं भी हो सकते हैं

आजकल कैमरों का बड़ा जोर है. बड़े से लेकर छोटे कैमरे कहीं भी मिल जाते हैं. पहले सिर्फ नेगेटिव या रील वाले ही कैमरे होते थे पर अब तो डिजिटल कैमरों ने दुनिया ही बदल दी. मोबाइल में कैमरा, कहीं भी निकल और चालू हो गए, फोटो खींचने में या फिर वीडियो बनाने में.

हिन्दुस्तान की हालत का अंदाज़ा लगाओ

अपनी मातृ भाषा की किस तरह धज्जियाँ उड़ाते हैं ये सरकारी नोटिस बोर्ड. क्या आपने गौर किया है इस तरह के नोटिस बोर्ड पर?